Shri Shiv Chalisa : यहाँ पर आपको प्रसिद्ध और लोकप्रिय Shri Shiv Chalisa Lyrics in Hindi and Englsih में पीडीएफ के साथ दिए दिए गए हैं. जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं. इस शिव चालीसा को आप भगवान शंकर जी की पूजा करते समय पढ़ सकते हैं. हिंदू धर्म में भगवान शिव को देवों दे देव कहा जाता हैं. इस शिव चालीसा की रचना अयोध्यादास जी ने की हैं.
भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता हैं. जैसे – भोलेनाथ, महादेव, शंकर, आदिनाथ, शम्भु, विश्वनाथ, आदि. भगवान शंकर जी सृष्टि के संहारक हैं. कैलाश पर्वत पर इनका निवास स्थान हैं. इनका रहन सहन एक तपस्वी की तरह हैं. इनकी पूजा के लिए सोमवार के दिन एवं प्रत्येक मास के त्रियोदशी (शिवरात्रि) के दिन सर्वोत्तम माना जाता हैं. इस दिन Shri Shiv Chalisa करने से शंकर जी प्रसन्न होते हैं. और भक्तों पर कृपा बनाएं रखते हैं.
शिव चालीसा
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥
मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥
मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥
धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥
नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥
FAQ
प्रश्न 01 – भगवान शिव के नाग (सर्प) का नाम क्या हैं?
भगवान शिव के गर्दन में जो सर्प लिपटा रहता हैं. उसका नाम वास्तुकि हैं.
प्रश्न 02 – शंकर जी के कितने पुत्र थे?
लोकप्रिय मान्यताओं के अनुसार शंकर जी के 5 पुत्र हैं. – कार्तिकेय, गणेश, सुकेश, भूमा और जलंधर.
प्रश्न 03 – शंकर जी के द्वारपालों का नाम क्या हैं?
भगवान शंकरजी के द्वारपालों का नाम हैं. – गणेश, नंदी, भृंगी, उमा-महेश्वर, वृषभ, रिटी, स्कंद और महाकाल.
प्रश्न 04 – भगवान शंकरजी का निवास स्थान कहा पर हैं?
शंकर जी का निवास स्थान तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत पर हैं.
प्रश्न 05 – शंकर भगवान के प्रमुख नाम कौन – कौन से हैं?
वैसे तो लोकप्रिय पुराणों में शिव के 108 नामों का वर्णन मिलता हैं. जो प्रमुख लोकप्रिय और प्रचलित नाम हैं. – शंकर, महाकाल, महादेव, नीलकंठ, महेश, रूद्र, भूतनाथ, शिवशंभु, हर, विशेश्वर, विश्वनाथ, प्रलयंकर, जगदीश, जटाशंकर, त्रिलोकेश, त्रियम्बक, आदिनाथ, भोलेनाथ, त्रिनेत्र, नटराज, गंगाधर, पशुपतिनाथ आदि.
प्रश्न 06 – शिव के बारह ज्योतिलिंगों का नाम क्या हैं?
शिव के बारह ज्योतिलिंगों का नाम हैं. – महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, केदारनाथ, घृष्णेश्वर, विश्वनाथजी, त्र्यम्बकेश्वर।
प्रश्न 07 – शिव चालीसा के रचयिता कौन है?
शिव चालीसा के रचयिता अयोध्यादास जी हैं।
प्रश्न 08 – शिव चालीसा में कितने दोहे और चौपाई हैं?
शिव चालीसा में कुछ 3 दोहें और 41 चौपाई हैं.